सोशल मीडिया का उपयोग करें, लेकिन पेशे की गरिमा से समझौता नहीं करें-बार काउंसिल ऑफ इंडिया का महत्वपूर्ण सर्कुलर
सोशल मीडिया का उपयोग करें, लेकिन पेशे की गरिमा से समझौता नहीं करें-बार काउंसिल ऑफ इंडिया का महत्वपूर्ण सर्कुलर - डॉ. पंकज वाधवानी, एडवोकेट एवं विधि विशेषज्ञ
इंदौर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी कर अधिवक्ताओं, विधि छात्रों, इंटर्न्स, बार एसोसिएशनों एवं विधि शिक्षण संस्थानों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सर्कुलर का उद्देश्य सोशल मीडिया पर बढ़ती अनैतिक प्रवृत्तियों पर रोक लगाना तथा न्यायालयों एवं अधिवक्ता पेशे की गरिमा बनाए रखना है।
डॉ. पंकज वाधवानी, एडवोकेट एवं विधि विशेषज्ञ ने सर्कुलर को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर कानूनी शिक्षा या विधिक जागरूकता को रोकना नहीं है, बल्कि ऐसे कंटेंट पर नियंत्रण करना है। जो न्यायपालिका, अधिवक्ता पेशे या न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुँचाता हो।
किस प्रकार के वीडियो और रिल्स नहीं बना सकेंगे - वाधवानी ने बताया कि अब अधिवक्ताओं और विधि छात्रों को कोर्ट परिसर, कोर्ट रूम, चेंबर, न्यायिक कार्यवाही या केस से जुड़े वीडियो, रील्स और प्रमोशनल कंटेंट बनाने से बचना होगा। न्यायालय की कार्यवाही को रिकॉर्ड करना, एडिट करके वायरल करना या न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों का उपहास उड़ाने वाले वीडियो साझा करना गंभीर अनुशासनहीनता माना जा सकता है।
क्लाइंट को गारंटीड रिलीफ दिलवाने की बातें, होगी उल्लंघन
डॉ. वाधवानी ने कहा कि बार काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिवक्ता सोशल मीडिया पर "गारंटीड बेल", "100% सफलता", "इंस्टेंट रिलीफ" या इसी प्रकार के भ्रामक दावे नहीं कर सकता। इसी प्रकार फर्जी निर्णय, नकली उद्धरण (Fake Citations), AI अथवा Deepfake के माध्यम से तैयार भ्रामक सामग्री का उपयोग भी प्रतिबंधित किया गया है।
अच्छी बात यह है कि जिम्मेदार विधिक जागरूकता, न्यायिक निर्णयों की शैक्षणिक चर्चा, कानूनी शिक्षा एवं तथ्यात्मक विश्लेषण पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ समाज में कानूनी जागरूकता फैलाने का कार्य पहले की तरह कर सकते हैं, लेकिन यह कार्य बिना प्रचार, बिना क्लाइंट आकर्षित करने और बिना परिणाम की गारंटी दिए किया जाना चाहिए।
डॉ. वाधवानी ने बताया कि सर्कुलर में विधि छात्रों एवं इंटर्न्स के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इंटर्नशिप के दौरान कोर्ट, चेंबर, क्लाइंट, केस फाइल या गोपनीय दस्तावेजों से संबंधित कोई भी फोटो, वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट साझा नहीं की जा सकेगी। सभी विधि महाविद्यालयों को छात्रों से डिजिटल एथिक्स संबंधी लिखित घोषणा-पत्र लेने के लिए भी कहा गया है। उन्होंने कहा कि यह सर्कुलर डिजिटल युग में अधिवक्ता पेशे की गरिमा, न्यायपालिका की प्रतिष्ठा, क्लाइंट की गोपनीयता और विधिक नैतिकता की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। सभी अधिवक्ताओं, विधि छात्रों और कानूनी कंटेंट बनाने वाले व्यक्तियों को इन दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करना चाहिए, जिससे समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और सम्मान बना रहे।


