तलवार रास, प्राचीन गरबा धनगरी गाजा, गोवा का कुनबी, गेडी सिद्धि धमाल गुस्साडी से शुभारंभ
*मालवा उत्सव का शुभारंभ कलाकारों के द्वारा*
*तलवार रास, प्राचीन गरबा धनगरी गाजा, गोवा का कुनबी, गेडी सिद्धि धमाल गुस्साडी से शुभारंभ*
*शिल्प बाजार हुआ गुलजार प्रतिदिन शुरू होगा 4:00 बजे*
इंदौर। मध्य प्रदेश की पहचान बन चुका मालवा उत्सव का आज भव्य शुभारंभ हुआ। लोक संस्कृति मंच एवं नगर पालिका निगम , संस्कृति संचनालय मध्यप्रदेश के सहयोग से मनाए जा रहे इस उत्सव में आज कला प्रेमियों की उपस्थिति दशहरा मैदान परिसर पर देखी गई।
लोक संस्कृति मंच के संयोजक शंकर लालवानी ने बताया कि पांडा गांव गोवा के प्राचीन मंदिर मंगेश मंदिर की प्रतिकृति बने मंच पर जनजाति एवं लोक नृत्यो ने अपनी अलग ही छाप छोड़ी जहां भील आदिवासी जनजाति का भगोरिया नृत्य आदिवासी अंचल की बांनगी दिखा रहा था जो की होली के अवसरों पर प्रमुख रूप से बाजारों में जवान आदिवासी लड़के लड़कियों के द्वारा किया जाता हैं। छत्तीसगढ़ से आए कलाकारों द्वारा गेड़ी नृत्य जो की गोंड मोरिया और भत्रा जनजाति द्वारा किया जाता है। मानसून के समय किया जाने वाला यह नृत्य लयबद्ध तरीके से बंबू स्टिक पर पुरुषों के द्वारा महिलाओं सथ खूबसूरती से पेश किया गया ।स्थानीय कलाकारों पूजा पटवर्धन जी समूह ने कालिया मर्दन का शास्त्रीय रूप में प्रस्तुतिकरण दिया वही कलाकारों द्वारा राम स्तुति और हनुमान चालीसा की प्रस्तुति नृत्य के माध्यम से दी गई। ओडिसी नृत्य का प्रस्तुतीकरण हुआ
*गोवा की संस्कृति झलकी मंच पर*
लोक संस्कृति मंच के संकल्प वर्मा एवं विशाल गिद्वानी ने बताया कि गोवा की कुनबी जनजाति के द्वारा किया जाने वाला परंपरागत नृत्य कुनबी प्रस्तुत किया गया जिसमें मछुआरों जैसे परिधान में प्रस्तुत किया गया था। तेलंगाना राज्य का गुस्साडी नृत्य जो की राज गोंड जनजाति द्वारा दीपावली के बाद आने वाले फेस्टिवल में किया जाता है बड़ा ही खूबसूरत बन पड़ा था जिसमें उन्होंने सिर पर खूबसूरत मोर पंख की घेरदार साफा पहन रखा था और गले में कई तरह की मालाए डालकर नृत्य कर रहे थे। गुजरात का सिद्धि धमाल जो की अफ्रीकन जनजाति जो 750 साल पहले यहां आकर बसी थी उनके द्वारा खूबसूरत हुआ जिसमें उन्होंने सर से नारियल फोड़ने का करतब दिखाए। प्राचीन गरबा रास जिसमें लाल पीली चनिया चोली पहनकर नृत्य किया गया यह नवरात्रि के अवसर पर किया जाने वाला रास है ।
वही झाला वारी रास का प्रस्तुतीकरण भी खास रहा जिसमें पगड़ी बंडी केडिया पहनकर हाथ में छोटे डंडे के साथ भगवान कृष्ण की आराधना की गई। महाराष्ट्र सांगली से आए कलाकारों द्वारा भगवान वारोबा देवता की आराधना धनगरी गाजा नृत्य के द्वारा की गई जिसमें सर पर गुलाबी फेटा बांध रखा था और पांव पर धोती पहन रखी थी आदिवासी तलवार नृत्य गुजरात के 21 कलाकारों द्वारा जिसमें से 8 महिलाएं थी प्रस्तुत किया गया जिसमें ढोल, थाली ,कुंडी शहनाई के साथ उछल-उछलकर तलवार से नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे। मालवा की मटकी जिसमें छतरी के साथ मटक मटक कर डांस किया गया चटकीले रंगों के परिधान में यह नृत्य खूबसूरत बन पड़ा था
लोक संस्कृति मंच के संकल्प वर्मा एवं पवन शर्मा ने बताया कि आज कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर कलाकारों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई. मंच पर विभिन्न राज्यों से आए कलाकार एवं स्थानीय कलाकार मौजूद थे। विधायक महेंद्र जी हार्डिया भी मौजूद थे।सांसद शंकर लालवानी की उपस्थिति में शुभारंभ कार्यक्रम संपन्न हुआ.
मंच के दीपक लवंगडे ने बताया कि शिल्प मेला सायंकाल 4:00 बजे से लालबाग पर प्रारंभ हुआ जिसमें कला प्रेमियों की उपस्थिति दर्ज की गई।
7 मई के कार्यक्रम शिल्प मेला सायंकाल 4:00 बजे सेत् सांस्कृतिक कार्यक्रम 7:30 बजे से गोवा का देखनी, धनगरी गाजा, सिद्धि धमाल नृत्य, तेलंगाना का गुस्सादी भगोरिया तलवार रस गरबा अहीर लाठी एवं स्थानीय कलाकारों के नृत्य होंगे।


