दूसरों के दुःख दूर करने और उनके आंसू पोंछने से बड़ी और कोई सेवा नहीं
दूसरों के दुःख दूर करने और उनके आंसू पोंछने से बड़ी और कोई सेवा नहीं
गीता भवन में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के श्रीमुख से भागवत कथामृत की वर्षा – आज शिव पार्वती विवाह प्रसंग
इंदौर। सेवा के कई स्वरूप होते हैं, लेकिन दूसरों के दुख दूर दरने और उनके आंसू पोंछने से बड़ी और कोई सेवा नहीं हो सकती। भगवान बुद्धि से नहीं भक्ति से मिलेंगे। बुद्धि तर्क करती है और भक्ति विश्वास। श्रद्धा और विश्वास के बिना की गई भक्ति और सेवा निरर्थक ही होती है, सेवा निष्काम होना चाहिए। भागवत जैसे धर्मग्रंथ हमें भक्ति और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
श्रीधाम वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने सोमवार शाम को गीता भवन सत्संग सभागृह में मंगल परिवार की मेजबानी में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मातुश्री श्रीमती कमलादेवी-बाबूलाल मंगल की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उक्त प्रेरक बातें कहीं। कथा शुभारंभ के पहले व्यासपीठ का पूजन आयोजन समिति की ओर से समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, टीकमचंद गर्ग, विष्णु बिंदल, शैलेन्द्र गुप्ता, विजय-कृष्णा गोयल आदि ने किया। कथा श्रवण के लिए आज भी गीता भवन में श्रद्धालुओं का सैलाब बना रहा। संगीतमय कथा के दौरान साध्वी कृष्णानंद द्वारा प्रस्तुत मधुर भजन भी भक्तों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। कथा 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक होगी। कथा के दौरान विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे।
महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने शुकदेव आगमन प्रसंग की कथा के दौरान कहा कि दुनिया के सारे काम करने के लिए अतिरिक्त पुरुषार्थ और कार्य करने की जरूरत होती है, लेकिन भगवान का भजन एकमात्र ऐसा काम है, जिसे करने के लिए किसी भी तरह का ताम-झाम, संसाधन या पुरुषार्थ करने की जरूरत नहीं पड़ती। अपना नियमित काम करते हुए भी हम भजन गाते हुए अपनी भक्ति कर सकते हैं। यह याद रखें कि भगवान हमारा अदृश्य साथी है, जो हमें नजर आए बिना भी कदम-कदम पर हमारी मदद करता है। जन्म जन्मांतर का सखा केवल परमात्मा ही हो सकता है अन्य कोई नहीं। हमारा असली साथी और मार्गदर्शक केवल परमात्मा ही है। इसलिए परमात्मा से जुड़े बिना हमारा जीवन धन्य नहीं हो सकता।
आज शिव पार्वती विवाह - भागवत कथा में तृतीय दिवस 26 को शिव पार्वती विवाह, 27 को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 28 को गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग, 29 को रुक्मणी विवाह एवं शनिवार 30 मई को समापन दिवस पर सुदामा चरित्र के पश्चात फूलों की होली खेली जाएगी।


