उपनगर लालबाग मे महाराष्ट्र की संस्कृति का रंग: घर-घर धूमधाम से मनाया गया किसानों का महापर्व 'बैल पोला'
बुरहानपुर विशेष सवाददाता सुभाष सपकाले
उपनगर लालबाग मे महाराष्ट्र की संस्कृति का रंग: घर-घर धूमधाम से मनाया गया किसानों का महापर्व 'बैल पोला'
बुरहानपुर: कृषि और किसानों के अटूट साथी यानी बैलों के प्रति सम्मान का प्रतीक, महाराष्ट्र का प्रमुख पर्व 'बैल पोला' मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर के उपनगर लालबाग में उपभोक्ता अधिकार संगठन के पदाधिकारी एवं सनातन सेना भारत के जिला अध्यक्ष अजय बारी ने भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया यह पर्व। महाराष्ट्र की सीमा से सटे होने के कारण बुरहानपुर में इस पर्व की खास रौनक देखने को मिलती है। इस वर्ष भी शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, इसे घर-घर में एक महापर्व की तरह मनाया गया।
घर-घर में उल्लास और पूजा-अर्चना
किसानों के लिए उनके बैल किसी देवता और परिवार के सदस्य से कम नहीं होते। पोला के दिन किसानों ने खेतों में काम रोककर अपने बैलों को पूर्ण विश्राम दिया और उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। बुरहानपुर में यह पर्व कुछ इस प्रकार मनाया गया:
बैलों का आकर्षक श्रृंगार:
सुबह से ही किसानों ने अपने बैलों को नहला-धुलाकर उनके सींगों को चमकीले रंगों से रंगा। उन्हें कौड़ियों की माला, घुंघरू और रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़ों से सजाया गया।
विधि-विधान से पूजा:
सजे-धजे बैलों को घर के आंगन में लाकर, परिवार के सभी सदस्यों ने उनकी रोली-अक्षत से पूजा की।
पारंपरिक पकवानों का भोग:
बैलों को विशेष रूप से तैयार किया गया नैवेद्य, मुख्य रूप से 'पूरन पोली' और अन्य पारंपरिक मीठे व्यंजन खिलाए गए।
कृतज्ञता और प्रार्थना:
किसानों ने बैलों की आरती उतारी और आने वाले वर्ष में सुख-समृद्धि व अच्छी फसल के लिए उनका आशीर्वाद लिया।


