सतत विकास एवं वैश्विक सहभागिता के माध्यम से भविष्य का निर्माण

सतत विकास एवं वैश्विक सहभागिता के माध्यम से भविष्य का निर्माण
इंदौर। श्री वैष्णव कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, इंदौर के आईक्यूएसी एवं एनडीएलआई क्लब (आईआईटी खड़गपुर) के संयुक्त तत्वावधान में नवाचार, सतत विकास एवं वैश्विक सहभागिता के माध्यम से भविष्य का निर्माण” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से किया गया। संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।  महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. परितोष अवस्थी ने स्वागत  भाषण कर सभी अतिथियों और प्रतिभागीयो काअभिवादन किया।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पुष्यमित्र भार्गव( महापौर इंदौर नगर निगम)थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि नवाचार को केवल भविष्य की अवधारणा के रूप में नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता के रूप में स्वीकार कर उसे व्यवहार में उतारना चाहिए। वर्तमान में किए गए नवाचार ही सशक्त और समृद्ध भविष्य का आधार बनते हैं। इस अवसर पर उन्हें महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से  राजकुमार भाटिया एवं अन्य प्रबंधन प्रतिनिधियों द्वारा स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. राजेश कुमार वर्मा( कुलपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर)ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने “आपदा से अवसर” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चुनौतियाँ और संकट नवाचार, अनुसंधान तथा विकास के नए द्वार खोलते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने तथा वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

विशिष्ट वक्ता डॉ. सचिन शर्मा (डीसीडीसी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर )ने समाजसेवा, प्रभावी संवाद एवं मानवीय मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का विकास करना भी है।

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के रूप में डॉ. मारिया लैम्प्रोउ, प्रो. क्रिस्टिना मौरिसियो, श्री सजीकोटा प्रदीप तथा डॉ. अनुश्का इवानियन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने सतत विकास, वैश्विक सहयोग तथा नवाचार-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर पुरुषोत्तमदास पसारी ने कहा कि सतत एवं समावेशी भविष्य के निर्माण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उनके उद्बोधन के पश्चात महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. परितोष अवस्थी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर बल दिया। तत्पश्चात श्री अरविंद गुप्ता ने संगोष्ठी की सफलता हेतु शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए ऐसे आयोजनों को ज्ञान-विनिमय एवं वैश्विक सहयोग का प्रभावी मंच बताया।

कार्यक्रम में शोध विषय का परिचय प्रो. विभोर ऐरन द्वारा प्रस्तुत किया गया।

तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुहास ढांडे (प्राचार्य, चमेली देवी कॉलेज), डॉ. विमल शर्मा (प्राचार्य, एनी बेसेंट कॉलेज) तथा डॉ. विपुल पटेल (सह-प्राध्यापक, एम.के.एच.एस. गुजराती महाविद्यालय) ने की। तकनीकी सत्रों में नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास, वैश्विक सहयोग, शिक्षा, प्रबंधन तथा सामाजिक विज्ञान से संबंधित विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। विशेषज्ञों द्वारा शोधपत्रों का मूल्यांकन कर उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र प्रस्तुति सम्मान प्रदान किए गए।कार्यक्रम के समापन में डॉ दिनेश दवे ने(ओ एस डी   उच्च शिक्षा भोपाल) से ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर शुभकामनाएं प्रेषित की।

संगोष्ठी में देश एवं विदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से कुल 192 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया। इनमें 89 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन तथा 85 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से शोधपत्र प्रस्तुत किए, जबकि 18 प्रतिभागियों ने सहभागिता श्रेणी में भाग लिया।

तकनीकी सहयोग में प्रो. राजेश सेठी, डॉ. राकेश उपाध्याय सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों का सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष दुबे द्वारा किया गया।

अंत में श्री महेश चिमनानी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में सहभागिता करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। महाविद्यालय प्रबंधन एवं आयोजकों ने इस सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।समापन कार्यक्रम में आभार प्रो श्रद्धा मान्धन्या द्वारा दिया गया।