प्लास्टर ऑफ पेरिस जहां मूर्तियों का निर्माण वही लगे रोक। धर्मेंद्र श्रीवास्तव,
प्लास्टर ऑफ पेरिस जहां मूर्तियों का निर्माण वही लगे रोक,
इंडियन न्यूज़ अड्डा जिला ब्यूरो चीफ़ धार जिला,
धर्मेंद्र श्रीवास्तव की रिपोर्ट -: प्रशासन का हो ध्यान केंद्रित,
गणेश उत्सव और नवरात्रि महोत्सव के महीनों पूर्व ही धड़ल्ले से होता हैं छोटी से लेकर बड़ी बड़ी मूर्तियों का निर्माण कार्य प्रारंभ केमिकल प्रक्रिया से होता हैं मूर्तियों का निर्माण जो कि पर्यावरण के लिए विशेष रूप से घातक हैं, जबकि इन मूर्तियों के पूजन का शास्त्रों में कोई वर्णन नहीं है,
(गणेश उत्सव के दस दिन एवं नवरात्रि के नव दिन)
प्लास्टर ऑफ पेरिस की बड़ी बड़ी मूर्तियां नुक्कड़ चौराहों पर स्थापित की जाती हैं, हिंदू सनातन धर्म ग्रंथो में ऐसी प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित मूर्तियों के पूजन का कोई वर्णन नहीं है,
शास्त्र प्रमाण है, कि केवल और केवल (नव इंच) की मिट्टी से वह भी किसी पवित्र नदी या गौशाला क्षेत्र एवं जलाशयों और कृषि भूमि से ली गई मिट्टी से निर्मित मूर्तियों के निर्माण और पूजन का और विसर्जन का महात्म्य हैं, आज मनोरंजन के समय में भक्ति केवल आस्था और विश्वास का विषय नहीं दिखावे का विषय रह गई है, इन बड़ी बड़ी मूर्तियों के विसर्जन के समय प्रशासन नदी तालाब और जलाशयों के निकट प्रशासनिक कर्मचारी की नियुक्ति कर विसर्जन पर रोक लगाने का दिखावा करता हैं, और प्रति वर्ष सोशियल मीडिया पर गलत तरीके से मूर्तियों के विसर्जन के विडियो प्रसारित होते हैं जिसके माध्यम से सनातन धर्म का मज़ाक बनाया जाता है जिससे धर्म की हानि होती हैं,
सरकार और प्रशासन सही दिशा में कानून बनाकर कार्य करे, जिससे सत्य सनातन धर्म की रक्षा हो सके और धर्म का माखोल ना उड़े इस सद्कार्य में देश भर के,
एवं क्षेत्रीय कथावाचकों आचार्यों पंडितों को धर्म के रक्षार्थ आगे बढ़कर सत्य का दर्शन कराकर अपने अपने कथा पंडालो से धर्म के न्यायोचित सत्य को उजागर कर धर्म का सत्य प्रचार कर अपने कर्तव्य पूर्ण धार्मिक कर्म का अनुसरण करना चाहिए,
(प्लास्टर ऑफ पेरिस जहां मूर्तियों का निर्माण वही लगे रोक)
(हिंदू सनातन धर्म ग्रंथो में ऐसी मूर्ति के पूजन एवं स्थापना का कोई वर्णन नहीं है)


