गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने के लिए इंदौर में ऐतिहासिक शंखनाद

गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने के लिए इंदौर में ऐतिहासिक शंखनाद
गौ माता सम्मान दिवस..... इंदौर उमड़े हजारों गौ भक्त
गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने के लिए इंदौर में ऐतिहासिक शंखनाद; संतों की अगुवाई में उमड़ा जनसैलाब
 चिलचिलाती गर्मी पर आस्था रही भारी एक आह्वान पर हजारों जूटे
चरण बद्ध आंदोलन क़ी शुरुआत देशभर क़ी तहसीलो पर दिया ज्ञापन, निकली रेलिया
इंदौर |  भारत की सांस्कृतिक विरासत और कृषि व्यवस्था की धुरी 'गौमाता' को संवैधानिक रूप से 'राष्ट्र माता' घोषित कराने के लिए देशव्यापी आंदोलन का बिगुल बज चुका है। गो सम्मान आवाह्नन अभियान' के तहत सोमवार को इंदौर की सड़कों पर आस्था, आक्रोश और संकल्प का ऐसा सैलाब उमड़ा कि शहर 'गौ माता की जय' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। संतों और गौरक्षकों ने दो टूक शब्दों में केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि गौवंश संरक्षण के लिए कठोर कानून और स्वतंत्र मंत्रालय चाहिए।
 हनुमान चौक  से कलेक्ट्रेट तक: आस्था का महाकुंभ
 श्री लक्ष्मण सिंह गौड़ मालव कन्या स्कूल के पास (धोबी घाट, हनुमान चौक) पर हजारों की संख्या में गौ-भक्त जुटना शुरू हो गए थे। रैली का दृश्य अत्यंत भव्य था—सबसे आगे शंख ध्वनि करते बटुक, सजे-धजे हाथी, पारंपरिक बैलगाड़ियां और पीछे भजन-कीर्तन करती हजारों मातृशक्तियां। विशाल रैली कलेक्टर कार्यालय पहुँची, तो वहाँ का दृश्य किसी महाकुंभ जैसा प्रतीत हो रहा था। यहाँ महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया।
5 सूत्रीय मांगें: जो गौवंश का भविष्य बदलेंगी
संस्था विश्वम के अध्यक्ष पारस जैन संस्था पाधिकारी एवं   संजय कटारिया, अभिषेक उदेनिया, मनोज तिवारी ने बताया कि सरकार के समक्ष पांच स्पष्ट मांगें रखी गई हैं:1. स्वतंत्र गो-मंत्रालय: पशुपालन विभाग से अलग एक समर्पित मंत्रालय का गठन।2. आजीवन कारावास:गोवंश वध को गैर-जमानती अपराध बना दोषियों की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान।3. प्राकृतिक खेती:गोबर और गोमूत्र की सरकारी खरीद सुनिश्चित करना।4. शिक्षा में गो-विज्ञान: स्कूली पाठ्यक्रमों में गौ-महिमा और विज्ञान को अनिवार्य विषय बनाना।5. गो-वाहिनी एम्बुलेंस: राजमार्गों पर प्रत्येक 50 किलोमीटर पर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराना।
गौमाता के लिए संत सज रखा जुट
> संत कार्तिक दास (उड़ीसा), संत जगदीश लाल (जगाया सी)संत अनिल कुमार उदासी, स्वामी कमल दास उदासीपंडित गोपाल कृष्ण भार्गव (गो कथावाचक), स्वामी भरत लाल उदासी स्वामी मोहन लाल, स्वामी पुरखा राम, स्वामी किशन लाला स्वामी शुंभ दास जोगी, स्वामी दयाल दास, स्वामी लालचंद्र प्रेम प्रकाशी
> स्वामी गणेश गिरी, स्वामी कमल पूरी, स्वामी जयेश दास, स्वामी माधव दास,स्वामी श्री हरिदास राम हंस, श्री अशोक भट्ट (मुख्य पुजारी, खजराना गणेश)श्री दीपेश जी व्यास (मुख्य पुजारी, रणजीत हनुमान), स्वामी अच्युतानंद महाराज (हरिद्वार) पवनदास  महाराज (हंस दास मठ),सदगुरु परिवार श्री अन्ना जी महाराज,डॉ. चैतन्य स्वरूप जी महाराज (अखंड धाम)महामंडलेश्वर श्री राम गोपाल दास जी महाराज (पंचकुइया पीठाधीश्वर, इंदौर),साथ ही जैन संत, संत दादू महाराज एवं समस्त मठ-मंदिरों के पुजारी एवं पदाधिकारी)
-16 माह का रोडमैप: 2027 में आर-पार की लड़ाई
यह आंदोलन महज एक दिवसीय प्रदर्शन नहीं है। संतों ने 2027 तक का विस्तृत रोडमैप घोषित किया है:* अक्टूबर 2026: राज्य स्तर पर बड़े शक्ति प्रदर्शन और आंदोलन।* फरवरी 2027: देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का घेराव।* 16 अगस्त 2027: यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो देशभर के गौभक्त अन्न त्यागकर केवल 'गंगाजल' पर रहकर अनिश्चितकालीन तपस्या करेंगे।* वर्जन गौमाता के सम्मान क़ी लड़ाई
संस्था विश्वम के अध्यक्ष पारस जैन ने कहा, "यह गौमाता के सम्मान की लड़ाई है। जब तक उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं मिलता, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। आज तहसील स्तर पर शंखनाद हुआ है, कल इसकी गूंज संसद तक सुनाई देगी।"
वर्जन गौ सेवा: आस्था, संस्कृति और पोषण का आधार "हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि गौ माता के भीतर 33 कोटि देवी-देवताओं
"सनातन धर्म में गौ माता को पूजनीय माना गया है, जिनमें 33 कोटि देवताओं का वास है। जहाँ गौ माता का सानिध्य होता है, वहाँ सभी दोषों का नाश होता है।
हमारी आस्था, संस्कृति और पोषण का आधार रही गौ माता के संरक्षण हेतु 'सशक्त गौ संरक्षण कानून' आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आइए, अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित करने का संकल्प लें।"
पं. योगेंद्र महंत
* राष्ट्रीय संयोजक, दिव्य संतान प्रकल्प
* पूर्व राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त), मध्य प्रदेश सरकार
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