कहानियां हमें चुनती हैं, हम सिर्फ उन्हें ईमानदारी से कहते हैं’: इम्तियाज अली

कहानियां हमें चुनती हैं, हम सिर्फ उन्हें ईमानदारी से कहते हैं’: इम्तियाज अली

कहानियां हमें चुनती हैं, हम सिर्फ उन्हें ईमानदारी से कहते हैं’: इम्तियाज अली

 दर्शकों से रूबरू हुए फिल्मकार, बोले- तकनीक है, लेकिन इंसानी भावनाओं और मौलिकता का विकल्प नहीं

इम्तियाज अली के नाम सेव है। 

 इंदौर। अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को मिल रहे जबरदस्त दर्शक प्रेम के बीच फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली इंदौर पहुंचे और दर्शकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म के भावनात्मक अंत, एआई के बढ़ते प्रभाव और फिल्म की प्रेरणा को लेकर खुलकर चर्चा की।

फिल्म के अंत को लेकर पूछे गए सवाल पर इम्तियाज अली ने कहा कि कहानी लिखते समय कई बार ऐसे मोड़ आते हैं, जहां लेखक के सामने आसान और भावनात्मक रूप से संतोषजनक विकल्प होते हैं, लेकिन वे कहानी की सच्चाई से मेल नहीं खाते। उन्होंने बताया कि फिल्म का अंत जानबूझकर वास्तविकता के करीब रखा गया, क्योंकि सुविधाजनक अंत कहानी की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता था।

फिल्म इंडस्ट्री में एआई के बढ़ते उपयोग पर उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण है, लेकिन भावनाओं और मानवीय अनुभवों को पूरी तरह समझना उसके लिए संभव नहीं है। उनके अनुसार हर इंसान की सोच, अनुभव और प्रतिक्रिया अलग होती है, जबकि मशीनें मूल रूप से उपलब्ध सामग्री को दोहराने का काम करती हैं। यही वजह है कि रचनात्मकता और संवेदनशीलता में इंसानों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

फिल्म की प्रेरणा के बारे में उन्होंने बताया कि पंजाब में शूटिंग के दौरान उन्हें विभाजन का दर्द झेल चुके कई परिवारों से मिलने का अवसर मिला। उनकी कहानियों और अनुभवों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया, जिसने फिल्म की कहानी को आकार दिया।

दर्शकों की प्रतिक्रिया पर इम्तियाज अली ने कहा कि अपने लंबे करियर में उन्होंने पहली बार देखा है कि दर्शक स्वयं दूसरों को फिल्म देखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने इसे अपने लिए आशीर्वाद बताते हुए कहा कि कुछ कहानियां लेखक या निर्देशक को चुनती हैं और उनका काम केवल उन्हें ईमानदारी से पर्दे पर उतारना होता है।