चिकित्सा पद्धतियां प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक है - पद्मश्री डॅा.एचआर नागेंद्र

चिकित्सा पद्धतियां प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक है - पद्मश्री डॅा.एचआर नागेंद्र

इंडेक्स हॉस्पिटल में शुरू हुआ मप्र का पहला इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग

 चिकित्सा पद्धतियां प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक है - पद्मश्री डॅा.एचआर नागेंद्र 

इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग के अंर्तगत डायलिसिस यूनिट का शुभारंभ 

गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी,संतुलित आहार और योग आधारित चिकित्सा पद्धतियों का लाभ एक ही स्थान पर 

इंदौर। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंडेक्स हॉस्पिटल ने मध्यप्रदेश के पहले इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग में डायलिसिस यूनिट का शुभारंभ किया है। इस विभाग के माध्यम से मरीजों को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी,सुंतलित आहार और योग आधारित चिकित्सा पद्धतियों का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा। विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के समन्वय से उपचार की गुणवत्ता और सफलता दर में वृद्धि होगी, जिससे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को अधिक प्रभावी और समग्र स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा। विभाग का शुभारंभ एस-व्यासा यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के कुलाधिपति एवं प्रख्यात योग वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र, आत्म वेद योग के फाउंडर डॉ. सदानंद रसल, मयंक वेलफेयर फाउंडेशन के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया तथा वाइस चेयरमैन मयंकराज सिंह भदौरिया द्वारा शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आत्म वेद योग का इंडेक्स हॅास्पिटल के साथ एमओयू भी साइन किया। इस पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र ने कहा कि चिकित्सा का भविष्य इंटीग्रेटिव मॉडल में विभिन्न चिकित्सा पद्धतियां प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक बनकर मरीज को सर्वोत्तम उपचार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद,होम्योपैथी,संतुलित आहार और आधुनिक चिकित्सा का वैज्ञानिक समन्वय कई जटिल रोगों के उपचार में बेहतर परिणाम दे रहा है। इस कार्यक्रम में मालवांचल यूनिवर्सिटी और आत्म वेदा के बीच योग वेलनेस पर एक एमओयू भी किया। 

 बीमारी के साथ व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को बेहतर लक्ष्य 

इंडेक्स हॉस्पिटल की यह पहल न केवल मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई दिशा और पहचान प्रदान करेगी। यह विभाग मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा के उस मॉडल को आगे बढ़ाएगा, जहां उपचार का लक्ष्य केवल बीमारी को ठीक करना नहीं बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाना होगा। देश के दक्षिणी राज्यों, दिल्ली और महाराष्ट्र में इंटीग्रेटिव मेडिसिन पर कार्य किया जा रहा है। अब इंदौर में इसकी शुरुआत होने से मध्यप्रदेश के मरीजों को भी इस आधुनिक और समग्र स्वास्थ्य मॉडल का लाभ मिल सकेगा। विभाग का सबसे बड़ा लाभ किडनी रोगियों को मिलेगा। यहां डायलिसिस के साथ होम्योपैथी,संतुलित आहार,योग एवं अन्य पूरक चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों तथा दीर्घकालिक रोगों के उपचार में भी यह विभाग भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर रिसर्च डायरेक्टर एस व्यासा यूनिवर्सिटी की प्रबंधक शारदा शंकर, जीएम राहुल मतसागर,बलवीर चावला,मालवांचल यूनिवर्सिटी की रिसर्च डायरेक्टर डॉ. लिली गंजू, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. स्वाति प्रशांत,आईआरसी डायरेक्टर डॉ. तपेश कुमार दुबे, मेडिकल डायरेक्टर डॉ. पवन भम्बानी,डॅा.जगत रावत,डॅा.रेशमा खुराना सहित अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक, शोधकर्ता उपस्थित रहे।