जूनापीठाधीश्वर की प्रेरणा से तैयार अवधूत गीता का विश्व का पहला  पीतल संस्करण शारदा पीठ शंकराचार्य को भेंट

जूनापीठाधीश्वर की प्रेरणा से तैयार अवधूत गीता का विश्व का पहला  पीतल संस्करण शारदा पीठ शंकराचार्य को भेंट

जूनापीठाधीश्वर की प्रेरणा से तैयार अवधूत गीता का विश्व का पहला  पीतल संस्करण शारदा पीठ शंकराचार्य को भेंट

इंदौर। स्वामी अवधेशानंद गिरी जी जूनापीठाधीश्वर की प्रेरणा से समर्पण से संसार पुस्तक द्वारा भगवान दत्तात्रेय की जयंती पर अवधूत गीता का पहला पीतल संस्करण जारी किया गया।                  संपादक एड. लोकेश मंगल  ने बताया की इंदौर पधारें शारदा पीठ  शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती  को अवधूत गीता का विश्व का पहला  पीतल संस्करण भेंट किया गया।

भगवान दत्तात्रेय से जुड़े इस पवित्र ग्रंथ में अद्वैत वेदांत के गहरे दर्शन पर आधारित 8 अध्याय और 289 श्लोक हैं। "अवधूत" शब्द का अर्थ है पूर्ण त्याग, सांसारिक मोह-माया से मुक्ति और मन की अस्थिरता तथा माया के भ्रमों से छुटकारा।

भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश - यानी त्रिमूर्ति - का संयुक्त अवतार माना जाता है। वे महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र हैं

दोनों तरफ छपे हुए 21 पन्ने हैं, जिनमें से हर एक 7 इंच लंबा और 5 इंच चौड़ा है। लेज़र प्रिंटिंग की प्रक्रिया में 1 घंटा 20 मिनट लगे, जबकि PLT फ़ाइल बनाने में 2 घंटे 10 मिनट और पीतल की शीट काटने में 8 मिनट का समय लगा। स्वामी अवधेशानंद गिरि ने इस पहल का पूरा खर्च उठाया है।

इसके पूर्व श्रीमद्भगवत  गीता का पहला पीतल का संस्करण जारी किया गया था। जिसमें महाभारत (भीष्म पर्व) के 700 श्लोक, 18 अध्याय और पीतल के 54 पन्ने शामिल थे।

स्वामी अवधेशानंद गिरि से प्रेरित होकर पीतल की रामायण तैयार की गई और उनके जन्मदिन पर इसे जारी किया गया था। इसमें 2481 PLT फ़ाइलें और पीतल के 1241 प्रिंटेड पन्ने हैं, जो रामायण के सभी सात कांडों को दर्शाते हैं और इन्हें बेहतरीन लेज़र तकनीक से तैयार किया गया है।