।।महिद्रवे महात्म्य।। धर्मेंद्र श्रीवास्तव,
माही नहीं,
महिद्रवे है,
इस महातीर्थ का पौराणिक नाम,
विष्णु और पृथ्वी की हैं,
यह पुत्री,
कहते हैं गुरु लोमश,
"गुप्त हैं इस महातीर्थ का महात्म्य"
लिखा है, स्कंद पुराण के कुमारिका खण्ड में,
स्कंद पुराण से संकलित समाचार,
संकलन-: धर्मेंद्र श्रीवास्तव,
"इंडियन न्यूज़ अड्डा"
जिला ब्यूरो चीफ़,
जिला धार,
सिद्ध क्षेत्र सरदारपुर में महि तट पर,
रितेश गुरु के मार्ग दर्शन में लगभग तीन वर्षों से लगातार २४ घंटे रात दिन भक्त कर रहे,
श्री राम चरितमानस पारायण पठन,
गुप्त महि कुण्ड पर हुई माँ के सुंदर विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा,
चौबीस घंटे हर घटी पल गौ मुख से बह रही महि अमृत धारा इस मीठे जल के पान से भक्त कर रहे आरोग्य की प्राप्ति, समाचार के अगले प्रकाशित संकलन में हम बताएंगे किस प्रकार से,
" बीस हजार छह सौ"
तीर्थों का सार महि में,
क्यों हैं भगवान शिव को प्रिय,
किस श्राप के कारण यह सबसे बड़ा महातीर्थ हुआ गुप्त तीर्थ क्षेत्र।
प्रतीक्षा करें,
माही नहीं,
महिद्रवे है,
इस महातीर्थ का पौराणिक नाम।


